Saturday, 1 August 2015

शायरी

तू ही मेरी शायरी 
दिन भी तू,रात भी तू,
चैन भी नींद भी 
सबमे शामिल है तू 
बता तुझे कैसे कहूँ कैसे लिखूं 
कैसे बयां करूँ
एक अलबेला अहसास है तू
मेरा दर्पण है तू
मेरी सूरत है है तू
संवर जाता हूँ में
जब श्रृंगार करती है तू।