तू ही मेरी शायरी
दिन भी तू,रात भी तू,
चैन भी नींद भी
सबमे शामिल है तू
बता तुझे कैसे कहूँ कैसे लिखूं
कैसे बयां करूँ
एक अलबेला अहसास है तू
मेरा दर्पण है तू
मेरी सूरत है है तू
संवर जाता हूँ में
जब श्रृंगार करती है तू।
दिन भी तू,रात भी तू,
चैन भी नींद भी
सबमे शामिल है तू
बता तुझे कैसे कहूँ कैसे लिखूं
कैसे बयां करूँ
एक अलबेला अहसास है तू
मेरा दर्पण है तू
मेरी सूरत है है तू
संवर जाता हूँ में
जब श्रृंगार करती है तू।