Thursday, 4 June 2015

कुछ तो बात होगी तुम्हारे हुस्न की। में बेबाक कैसे तारीफ़ करू अल्फाज ढूंढता हु।

होते होंगे रिश्ते ख़त्म गलतफहमिओं में। हमने तो मोहब्बत ही कर डाली ग़लतफ़हमी में।

Wednesday, 3 June 2015

कशिश

वक्त ने रहम किआ कुछ हम पर ऐसे
जब ना थी उम्मीद तब वो सामने आये

ना समझे कुछ बेजुबां से हो गए
अश्कों ने समझा चस्म कुछ नम हुए

बड़ी बदसुलूकी ये दिल कर रहा था
ये कैसी कशिश थी कुछ समझ नहीं पाए

पूछेंगे तो सवाल मिलने पे उनके
न वो कुछ कह पाये न हम कुछ कह पाये

नाम आख्नो ने बयां कर दी परेशानी दिल की
भुला दिया सब कुछ जब  तुम  पास आये.

धीरेन्द्र सिंह चौहान "देवा"

Tuesday, 2 June 2015

यारों कि यारी

यारों कि यारी

यारों की ऐसी यारी में महफिल सजा ली हमने
मजबूर हुआ कुछ ऐसा कलम उठा ली हमने
लिखना चाहा दिल को बड़े अरमानो के साथ
जाने ये क्या हुआ सब जुबानी बता दिआ हमने

दिल की ये दुनिया मेरे यारों से ही चलती है
दूर् रहु जब इनसे यारी बड़ी बुरी खलती है
जब तक बातें ना हो दो चार इधर उधर की
तुम ही जानो यार ये शाम कैसे ढलती है

सुक्र्गुजार हूँ खुदा तेरा ये जो रीत बनायी है
दुनिया में दोस्त बनाकर ये दोस्ती सीखलायी है
दुआ करता हूँ तुझसे इन्हे खुस रखना तुम हरदम
फुल मेरी बगिया के हैं जिनसे ये रौनक आयी है.  

धीरेंद्र सिंह चौहान "देवा"