वक्त ने रहम किआ कुछ हम पर ऐसे
जब ना थी उम्मीद तब वो सामने आये
ना समझे कुछ बेजुबां से हो गए
अश्कों ने समझा चस्म कुछ नम हुए
बड़ी बदसुलूकी ये दिल कर रहा था
ये कैसी कशिश थी कुछ समझ नहीं पाए
पूछेंगे तो सवाल मिलने पे उनके
न वो कुछ कह पाये न हम कुछ कह पाये
नाम आख्नो ने बयां कर दी परेशानी दिल की
भुला दिया सब कुछ जब तुम पास आये.
धीरेन्द्र सिंह चौहान "देवा"
जब ना थी उम्मीद तब वो सामने आये
ना समझे कुछ बेजुबां से हो गए
अश्कों ने समझा चस्म कुछ नम हुए
बड़ी बदसुलूकी ये दिल कर रहा था
ये कैसी कशिश थी कुछ समझ नहीं पाए
पूछेंगे तो सवाल मिलने पे उनके
न वो कुछ कह पाये न हम कुछ कह पाये
नाम आख्नो ने बयां कर दी परेशानी दिल की
भुला दिया सब कुछ जब तुम पास आये.
धीरेन्द्र सिंह चौहान "देवा"
wah khoob bahut khoob DEVAji
ReplyDelete