Wednesday, 26 November 2014

तेरी बातें

जब कही कभी तेरा जिक्र आया.
हमे अजीब सी उदासी ने घेरा वक्त ने मारा
ना थे हम कुछ भी सुनने के काबिल
कदम रुक ही गए, और दिल फिर दुनिया से हारा...


धीरेंद्र सिंह चौहान "देवा"

मीत...

जब हम तुम दोनों मीत बने
सपनो में ऐसे कुछ गीत बने.
में संवारु तुझे ख्यालों में
कुछ ऐसे परस्पर प्रीत बने

तेरा मासूम ख़याल दिल में आज भी है
तेरी भोली सूरत दिल में आज भी है
मुग्ध कर देने वाली मुस्कराहट तेरी
चाहूँ में यूँ ही कुछ तो ऐसी रीत बने.

सोचता हूँ कभी न मिल पाऊँ तुझे
यूँ ही दूर से हर रोज निहारूं तुझे
निभाता जाऊं इस रिश्ते को ऐसे
मेरे खुदा कुछ तो ऐसी जीत बने.

धीरेन्द्र सिंह चौहान "देवा"