Tuesday, 14 June 2016

चाहते हैं तुझे हम बहुत।

चाहते हैं तुझे हम बहुत।
करते याद हैं तुझे हम बहुत।
तू अगर जेहन में ना मिले।
तो तड़प जाते हैं हम बहुत।
न जाने क्या रिस्ता है तुझसे।
मगर हर रिश्ते से आगे हैं हम बहुत।
तू ज़माने की खुसी ला देती है मुझे।
तेरी मुस्कराहट पे मर मिटते हैं हम बहुत।
तू काश मेरा अक्स होता।
ये न जाने क्यों सोचते हैं हम बहुत।
तेरा मिलना और खिलखिलाना।
क्यों याद आता है हमे बहुत।
सुन न।
ये मुझे आदत है तुझे बुलाने की।
कब तू मेरे पास आएगी इन्तजार है हमे बहुत।।


धीरेन्द्र सिंह चौहान