वाकिफ हूँ में ....
ऐ शहर तेरे दर्द से वाकिफ हूँ में, तेरी याद दिल को को झकझोर देती हैं
टूट जाता हूँ में में.. ऐ शहर तेरे दर्द से वाकिफ हूँ में,
उस पथरीली राह पर अब धूल उड़ती नहीं ना जाने कहाँ खो गयी
वो फूलों का बाजार यहाँ होता था वो खुसबू अब जाने कहाँ गयी
वो दमकता चेहरा, सुबह की ताजगी, अपने रंग में खुसी से लरजते लोग
चहकता बचपन, पाठशाला का शोर, और उस राह पर चलने वालों का जोर
सुनहरी शाम की हलकी सी थकान, जाने कहाँ खो गयी
सदियों से समेटे हुए बृहद इतिहास को छुपा लिया
तेरे तकदीर की इस दास्तान से वाकिफ हूँ में ऐ शहर तेरे दर्द से वाकिफ हूँ में
कई रंग देखे और तेरी बादशाहत भी देखि
वो तेरे अस्तित्व को बचाये रखने की वो लम्बी लड़ाई भी देखि
हजारों गाओं का हुजूम उमड़ता था ऐसी सुबह और कई शाम भी देखि
किसी का बचपन और किसी की ममता, वो पाठशाला और दौड़ धुप भी देखि
सदियों से चला आ रहा और चुपचाप इतिहास बनता जाता ऐसी कागज़ पर वो स्याही भी देखि
मगर जो कल था और कल जो होगा, बहुत बदल गया और बदल जायेगा
तेरे शहर वालों के बदले हालत और ठिकानो से वाकिफ हूँ मेंऐ शहर तेरे दर्द से वाकिफ हूँ में
पावन गंगा की धारा और महलों से सजा हुआ बृहद गढ़वाल को अपने में समेटा हुआ
हरियाली से लहकते खेत, सब और फूलों से घिरा हुआ
आज मिला था एक बूढा बूढा उम्र की लाठी पर झुका हुआ बीते बचपन की यादों और तेरे हाल पर रोता हुआ
लगता था अब सब ख़त्म हो गया एक ऐतिहासिक धरोहर फिर से नुमाइस के लिए तैयार है
आज लोग बस घूमने जाते हैं और यादें ले जाते हैं, सायद ही कोई तेरी कुर्बानी को जानता होगा
इंसान क्यों हैं ऐसे वाकिफ हूँ में
ऐ शहर तेरे दर्द से वाकिफ हूँ में........
धीरेन्द्र सिंह चौहान "देवा"
ऐतिहासिक शहर टिहरी को समर्पित।
itna acha likha he DEVAJI k shabd nai mil rahe.. keep wrting pls..
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