Wednesday, 24 September 2014

लाल दुपट्टे वाली..


तेरे दुपट्टे के रंग में कुछ यूँ रंगा हूँ में
न जीना आये, न मरना ही आये

सुर्ख लाल रंग की चुनर ओढ़ी है जो तुमने
 देखकर इसे, तेरा चेहरा ही याद आये

ना ढाओ सितम यूँ ना जुल्म ही करो
दुआ ही करो जब दवा कोई काम ना आये

आदत ही है तुम्हारी यूँ जलवे बिखेरने की
और किस्मत है अपनी के दीदार हो जाये

हमे ही रहना होगा कुछ अब संभलकर
ना जाने कब यूँ कही कोई बिजली गिरा जाए

ख़ुसनसीबी है अपनी, तुम दोस्त हो मेरे, नायाब हो, खूबसूरत हो.
सलामत रहना, मुस्कुराते रहना, दिल से बार बार यही फ़रियाद आये.

धीरेन्द्र सिंह चौहान "देवा"


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