Friday, 19 December 2014

एहसास..

ना करेंगे अब हम बातें हजार उनसे.
रहने दो टूटा ना जोड़ों कोई तार उनसे..
यूँ ही पड़ा रहने दो मेरे खयालो को बिखरा
ना जुड़ने के हैं कोई आसार उनसे..
आज कह दिया किसी को हमने एहसास हमारा
रहे सलामत ये ये हमारा एहसास उनसे...
दुनिया में तो मिलने को और भी होंगे
नही दरकार कोई, ऐसी लगी है कुछ ख़ास उनसे
कुछ भी कह  दो अब हमे तुम लोगो
हमे जाना है दुबारा मिलने फिर आज उनसे
वो जाने हमे समझते होंगे क्या कुछ.
ना जानेंगे कभी पूछकर ये बात उनसे.

धीरेंद्र सिंह चौहान "देवा"

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