Tuesday, 30 December 2014

ग़ज़ल

हम गर नजर मिलाये जो उनसे तो क्या बात हो
वो निगाहों से समझे राज सारे तो क्या बात हो.
हम गर नजर मिलाये जो उनसे तो क्या बात हो

चाहें तो हम यही कि मेरी वो नजरबंद हो.
और वो बैठ जाए मेरे सामने तो क्या बात हो
हम गर नजर मिलाये जो उनसे तो क्या बात हो

हम गा रहे हैं नग्में महफिल भी ये जंवा है
और प्यार से वो झूम जाएँ तो क्या बात हो
हम गर नजर मिलाये जो उनसे तो क्या बात हो

पहले नही हुआ जो वो कुछ आज हो ही जाए
कर दे कबूल हमे सरेआम तो क्या बात हो
हम गर नजर मिलाये जो उनसे तो क्या बात हो

हम गर नजर मिलाये जो उनसे तो क्या बात हो
वो निगाहों से समझे राज सारे तो क्या बात हो.
हम गर नजर मिलाये जो उनसे तो क्या बात हो

धीरेंद्र सिंह चौहान "देवा"

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