Wednesday, 15 July 2015

दिल की बातें

कब समझोगे दिल की बातें
तुम नादां अब और नहीं
में मनाऊं तुम्हे हर रुठने पर
ये कहानी वो नहीं
ढल जाए जो शाम यही पर
ये राहें अब वो नहीं
कब समझोगे दिल की बातें
तुम नादां अब और नहीं
यूँ तो नगमे गाये हैं लोगों ने
हम जो गाये वो गीत नहीं
कब अमर है प्रेम जहाँ में
और ऐसी कोई प्रीत नहीं
क्या याद रक्खे कोई हमे
अब है वो निशानी और नहीं
कब समझोगे दिल की बातें
तुम नादां अब और नहीं

धीरेन्द्र सिंह चौहान "देवा"

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