तुमने कहा था मुझे भुला देना जब में नहीं
बसा लेना दुनिआ अपनी जहा में नहीं
मगर मेरे प्यार को रखना संभालकर कुछ इस तरह
के जिसकी हसरत में रखूं पर तुम नहीं
याद है अब भी तुम्हारा आना उस प्रेम की चौखट पर
गुनगुनाना गीत कोई आकर मुझसे यूँ लिपटकर
मगर आज उस घर में तो में रहता नहीं
कोई हवा बहती भी होगी या तो नहीं
वक़्त बदला हालात बदले ये देश बदला
उम्र बदली सोच बदली ये रंग बदला
तुम न बदले हो अभी भी मेरी सोच में
ना वो चेहरा ही और न चश्मे नूर बदला
खोकर किसको अब पा जाऊंगा में तुम्हे
तुम भी न करना याद कभी भूले से हमे
यूँ ही दुनिआ चलती है ये दिन चले जायेंगे.
मिल जो जाओ कभी किसी मोड़ पर, देखकर मुस्कुरा देना हमे...
धीरेन्द्र सिंह चौहान "देवा"
very touchy.. DEVAJi kya likha he.. khokar kisko ab paa jaunga tumhe.. wah wah
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