जब हम तुम दोनों मीत बने
सपनो में ऐसे कुछ गीत बने.
में संवारु तुझे ख्यालों में
कुछ ऐसे परस्पर प्रीत बने
तेरा मासूम ख़याल दिल में आज भी है
तेरी भोली सूरत दिल में आज भी है
मुग्ध कर देने वाली मुस्कराहट तेरी
चाहूँ में यूँ ही कुछ तो ऐसी रीत बने.
सोचता हूँ कभी न मिल पाऊँ तुझे
यूँ ही दूर से हर रोज निहारूं तुझे
निभाता जाऊं इस रिश्ते को ऐसे
मेरे खुदा कुछ तो ऐसी जीत बने.
धीरेन्द्र सिंह चौहान "देवा"
सपनो में ऐसे कुछ गीत बने.
में संवारु तुझे ख्यालों में
कुछ ऐसे परस्पर प्रीत बने
तेरा मासूम ख़याल दिल में आज भी है
तेरी भोली सूरत दिल में आज भी है
मुग्ध कर देने वाली मुस्कराहट तेरी
चाहूँ में यूँ ही कुछ तो ऐसी रीत बने.
सोचता हूँ कभी न मिल पाऊँ तुझे
यूँ ही दूर से हर रोज निहारूं तुझे
निभाता जाऊं इस रिश्ते को ऐसे
मेरे खुदा कुछ तो ऐसी जीत बने.
धीरेन्द्र सिंह चौहान "देवा"
bahuuuuuuuuut hi achaa..
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