तुझसे भी ये जाने कैसी रिस्तेदारी हो गयी है.
ना थे जिस कम के उसकी अब जिम्मेदारी हो गयी है.
तुझे यूँ ही चाहना सबब बन गया है.
दिल की भी ये जाने कैसी लाचारी हो गयी है.
हर पल हम अब ख़बर तुम्हारी रखते हैं "देवा"
दोस्तों में भी अब हमारी किस्सेदारी हो गयी है.
यूँ ही इबादत करेंगे हम तेरी मोहबत की.
तू चाहे या ना चाहे, कुछ ऐसी जवाबदारी हो गयी है.
धीरेंद्र सिंह चौहान "देवा"
bahut achha likha he.. hats off 2 u :-)
ReplyDeleteजवाबदारी तो ठीक है रिस्तेदारी ठीक नहीं है :P :P
ReplyDeleteजवाबदारी तो ठीक है रिस्तेदारी ठीक नहीं है :P :P
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